हादसों के राजमार्ग

सड़क हादसों के साथ उनमें होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि का एक कारण यह है कि राजमार्गा के संदर्भ में जिस अनुशासन का परिचय दिया जाना चाहिए , उसका घोर अभाव है ।

मार्ग दुर्घटनाओं पर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार 2018 में सड़क किनारे गलत तरीके से खड़े किए गए वाहनों की टक्कर से होने वाले हादसों में 91 प्रतिशत की वृद्धि हुई है । यह रिपोर्ट ये भी बता रही है कि आमने - सामने की टक्कर से होने वाले हादसों में भी वृद्धि हुई है । इतना ही नहीं , अन्य अनेक कारणों से होने वाली दुर्घटनाएं । भी बढ़ रही हैं । इसका सीधा अर्थ है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय अपने इस दावे पर खरा नहीं उतर सका कि वह मार्ग दुर्घटनाओं पर लगाम लगाएगा । अगर हकीकत दावे के उलट है तो यह गंभीर चिंता का विषय बननी चाहिए । 

" जब राजमार्गों पर हादसे बढ़ते जा रहे हों , तब फिर इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है कि अन्य मार्गों पर हादसों की क्या स्थिति होगी । " यह बिल्कुल भी ठीक नहीं कि जैसे - जैसे राजमार्ग बढ़ते और बेहतर होते जाएं , वैसे - वैसे हादसे और उनके चलते होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ती जाए । सड़क हादसों के साथ उनमें होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि अन्य बातों के साथ यह भी रेखांकित करती है कि राजमार्गों के संदर्भ में जिस अनुशासन का परिचय दिया जाना चाहिए , उसका घोर अभावव्याप्त है । 

राजमार्ग इसलिए नहीं होते कि उनमें इक्का तांगा , साइकिल , ट्रैक्टर के साथ कार , बस और ट्रक तो चलें ही , पालतू एवं आवारा जानवर भी विचरते नजर आएं । दग्यि से अपने देश में यही स्थिति है । अजीब यह है कि जैसे ही कोई नया राजमार्ग बनता या फिर संवरता है , वैसे ही उसके दोनों तरफ या तो बसाहट शुरू हो जाती है अथवा छोटी - बड़ी दुकानें खुल जाती हैं । रही सही कसर इससे पूरी हो जाती है कि दिन हो या रात , जिसे जहां मन करता है , वहीं अपना वाहन खड़ा कर देता है या फिर सवारियां अथवा सामान उतारने - चढ़ाने लगता है । 

राजमार्गों पर वाहन चलाने या उन्हें पार्क करने संबंधी हर नियम कायदे का उल्लंघन होने के साथ यह भी खूब दिखता है कि औसत लोग अपेक्षित सावधानी का परिचय देने से इनकार करते हैं । इसकी एक वजह यातायात पुलिस की बेपरवाही है । यदि कभी राजमार्गों पर व्याप्त अनुशासनहीनता के खिलाफ कदम उठाए जाते हैं तो नेतागीरी शुरू हो जाती है । अक्सर यह नेतागीरी इसलिए होती है , ताकि राजमागों का मनचाहा इस्तेमाल किया जा सके । आम तौर पर शासन - प्रशासन इस नेतागीरी के समक्ष समर्पण ही करता है । 

यह अनिवार्य है कि विकास के वाहक माने जाने वाले राजमार्गों को जानलेवा हादसों का अड्डा बनने से रोकने के हरसंभव उपाय न केवल केंद्र सरकार , बल्कि राज्य सरकारें भी करें । इन हादसों पर केवल अफसोस जताने का कोई मतलब नहीं ।

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