वन्यप्राणियों के लिए जिनके हृदय से फूटती है दया

मनुष्य जिस तरह से जंगल की भूमि पर अतिक्रमण कर रहा है उसकी भयावह कीमत भी उसे चुकाना पड़ रही है । पीरा राम ऐसे समुदाय से आते हैं जो प्रकृति के प्रति सहिष्णुता दिखाने के लिए ख्यात रहा है । एक बार एक सड़क किनारे उन्होंने जब वाहन से घायल एक चिंकारा को देखा तो उनका मन द्रवित हो गया और उन्होंने इन वन्यजीवों के संरक्षण का काम अपने हाथ में ले लिया । 

उनकीजो भी कमाई होती है उससे वह वन्य प्राणियों की चिकित्सा और सेवा में लगाते  हैं और उन्हें स्वस्थ करके फिर से जंगल में छोड़ । देते हैं । अपने ही घर से शुरुआत करते हुए उन्होंने एक छोटे से टुकड़े कोशेल्टर होम में बदल दिया है जहां 1200 प्राणियों के देखरेख वह कर रहे हैं । 

एक दशक में इन प्राणियों की रक्षा करते हुए उनका पुलिस और शिकारियों दोनों से सामना हुआ । उन्होंने दोनों ही स्थितियों में अपने मिशन को जारी रखा । वह कहते हैं , ' हमारे समुदाय में वन्य पर्यावरण की रक्षा बचपन से ही सिखाई जाती है । मेरे माता पिता हमेशा कहा करते थे कि जानवरों से हमें कोई खतरा नहीं है और उन्हें बचाया ही जाना चाहिए ।

Comments