नई पीढ़ी में कौशल जरूरी

इस समय देश और दनिया में भारत से संबंधित शैक्षणिक और प्रशिक्षण की विश्व रैंकिंग से संबंधित दो रिपोर्ट को गंभीरतापूर्वक पढ़ा जा रहा है । एक रिपोर्ट 26 नवंबर को प्रकाशित क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी एशिया रैंकिंग - 2020 है । इसमें कहा गया है कि 2019 में भारत के अधिकांश प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थाओं की रैंकिंग में गिरावट आई है । 

देश का कोई भी शिक्षण संस्थान अन्य एशियाई संस्थाओं की तुलना में शीर्ष 30 में जगह नहीं बना सका है । आईआईटी मुंबई पिछले वर्ष के मुकाबले एक स्थान फिसलकर 34वें स्थान पर आ गई । आईआईटी दिल्ली 43वें स्थान पर और आईआईटी मद्रास 48वें स्थान पर हैं । इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक शिक्षा अध्ययन के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी छात्रों की आबादी भारत में होगी । ऐसी नई आबादी को रोजगार योग्य बनाने के लिए भारत को अध्ययन तथा शोध कार्य में निवेश बढ़ाना होगा ।

दूसरी रिपोर्ट भारतीय युवाओं की प्रतिभा , गुणवत्तापूर्ण जीवन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से संबंधित है । पिछले दिनों 18 नवंबर को विश्व विख्यात आईएमडी बिजनेस स्कूल स्विट्जरलैंड द्वारा प्रकाशित की गई ग्लोबल टैलेंट रैंकिंग 2019 को गंभीरतापूर्वक पढ़ा जा रहा है । भारत 63 देशों की सूची में पिछले वर्ष के 53वें स्थान से छह पायदान फिसलकर 59वें स्थान पर आ गया है । इस टैलेंट रैंकिंग में स्विट्जरलैंड लगातार छठे साल शीर्ष पर रहा है । डेनमार्क दूसरे और स्वीडन तीसरे स्थान पर हैं ।

चीन इस सची में 42वें स्थान पर है । गौरतलब है कि टैलेंट रैंकिंग की इस वैश्विक सूची में प्रतिभाओं के विकास , उन्हें आकर्षित करने , देश में ही रखने तथा उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए किए जा रहे निवेश के आधार पर रैंकिंग दी गई है । इस टैलेंट रैंकिंग सूची के प्रकाशन के साथ सूची में शामिल विभिन्न देशों में टैलेंट की स्थिति के बारे में भी टिप्पणियां की गई हैं । भारत के बारे में कहा गया है कि टैलेंट पूल की गुणवत्ता के मामले में भारत का प्रदर्शन औसत से बेहतर है , लेकिन अपनी शैक्षणिक प्रणाली की गुणवत्ता और सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की कमी , गुणवत्तापूर्ण जीवन की कमी , प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने की क्षमता में कमी के कारण निवेश और विकास के मामले में भारत सूची में शामिल देशों में बहुत पीछे है ।

निश्चित रूप से हमारा ग्लोबल टैलेंट रैंकिंग 2019 में बहुत पीछे रहने पर चिंतित होना और आगे बढ़ने की राह निकालना इसलिए जरूरी है , क्योंकि देश की नई पीढ़ी को टैलेंटेड बनाकर ही रोजगार की संभावनाओं को साकार किया जा सकेगा और देश की तस्वीर को चमकीला बनाया जा सकेगा । इस समय देश में तेजी से बढ़ती हुई बेरोजगारी के मद्देनजर जीवन गुणवत्ता , सार्वजनिक शिक्षा पर अधिक व्यय और कौशल विकास से ही रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ने की संभावनाएं हैं । हाल ही में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने श्रमबल के नवीनतम आंकड़े जारी करते हुए कहा है कि वर्ष 2017 - 18 के दौरान बेरोजगारी दर 6 . 1 फीसदी रही है । देश में बेरोजगारी की यह दर 45 साल में सर्वाधिक है ।

इसमें दोमत नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में श्रम का आधिक्य है , लेकिन कौशल की कमी है । योग्यता के अभाव के कारण ऊंची डिग्री रखने वाले युवा भी नौकरियों से दूर हैं । यकीनन इस समय दुनिया के साथ - साथ देश का भी रोजगार परिदृश्य तेजी से बदल रहा है । ऐसे बदलते परिदृश्य में रोजगार की जरूरतें भी बदल रही हैं । उद्योग कारोबार में रोबोट , आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमता और 3डी प्रिंटिंग सहित नई - नई तकनीकों का उपयोग बढ़ता जा रहा है । निश्चित रूप से देश और दुनिया में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है ।

खासतौर से देश में मेक इन इंडिया की सफलता के लिए कौशल प्रशिक्षित यवाओं की जरूरत है । ख्याति प्राप्त स्टाफिंग फर्म मैनपॉवर ग्रुप की स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में उद्योग - कारोबार के लिए पर्याप्त संख्या में टैलेंटेड प्रोफेशनल्स नहीं मिल रहे हैं । भारतीय पेशेवरों की आवश्यकता बताने वाली कई और महत्वपूर्ण रिपोर्ट दुनिया और देशभर में रेखांकित हो रही हैं । ये रिपोर्ट बता रही हैं कि एक ओर भारत के आईटी , मैनेजमेंट , इंजीनियरिंग , मेडिकल , लॉ , अकाउंटिंग आदि पेशेवर पढ़ाई वाले शिक्षित - प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत बढ़ती जा रही है । वहीं दूसरी ओर देश के उद्योग - व्यवसाय में कौशल प्रशिक्षित लोगों की मांग और आपूर्ति में लगातार अंतर बढ़ता जा रहा है । ऐसे में जरूरी है कि भारत डिग्री के साथ टेक्निकल स्किल्स एवं प्रोफेशनल स्किल्स से दक्ष प्रतिभाओं का निर्माण करे ।

रोजगार के लिए कौशल युक्त प्रतिभाओं का निर्माण इसलिए भी जरूरी है , क्योंकि रोजगार के मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ रहे रोबोट चुनौती देते हुए दिखाई दे रहे हैं । जहां रोबोट ने मनुष्य को शारीरिक क्षमताओं के मामले में पीछे छोड़ दिया है , वहीं अब दिमागी कामों के मामले में भी रोबोट इंसान को पछाड़ सकते हैं । ऐसे में रोबोट से भी रोजगार प्रतिस्पर्धा के लिए युवाओं के पास आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जरूरी है । सचमुच यह विडंबना ही है कि सरकार द्वारा प्रतिभाओं के विकास और कौशल प्रशिक्षण को उच्च प्राथमिकता दिए जाने के बाद भी प्रतिभाओं के विकास में हम बहत पीछे हैं ।

सरकार द्वारा देश में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय गठित करके कौशल विकास के काम को गतिशील बनाने की पहल के भी आशाजनक परिणाम नहीं आए हैं । इस विभाग ने वर्ष 2016 से 2020 तक एक करोड़ लोगों को । प्रशिक्षण देने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आरंभ की थी , लेकिन अक्टूबर 2016 से जून 2019 तक कोई 52 लाख लोगों को ट्रेनिंग दी जा सकी है । इनमें से करीब 12 . 5 लाख लोगों को रोजगार मिला । अब हमें आईएमडी की ग्लोबल टैलेंट रकिंग 2019 के मद्देनजर महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे । 

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