जन्म से होते हैं गुण , कोई शिक्षक नहीं सिखाता

कहते हैं कि कोई अपना व्यवहार बदल सकता है लेकिन अपनी प्रकृति नहीं , जैसे धरती के आने के बाद इंसान अपने अनुभवों , परवरिश , ज्ञान आदि माध्यमों से बहुत कुछ सीखता है लेकिन फिर भी व्यक्ति में कुछ चीजें प्राकृतिक रूप से होती हैं , जिसे कभी बदला नहीं जा सकता या ये बातें उन्हें कोई भी नहीं सिखा सकता । 

चाणक्य नीति में जिन गुणों का उल्लेख किया गया है उनमें दान भी एक गुण है । दान का अमीर - गरीब या कम ज्यादा से कोई लेना - देना नहीं होता । दान करने की एक प्रकति होती है , जो लोगों में जन्मजात होती है । जिसके पास भंडार भरे रहते हैं , वो यह गुण न होने पर दान नहीं करता , जबकि मध्यवर्गीय व्यक्ति अपने हिस्से में से कुछ हिस्सा जरुरतमंद को दान कर देता है । 

दान देने वाले लोगों में दूसरों के दुख को समझने का गुण होता है । वो दूसरे के दुख से दुखी हो जाता है । इसी प्रकार धैर्य भी एक कीमती गण है । आप किसी भी इंसान को धैर्य रखने का पैमाना नहीं सिखा सकते । सभी में धैर्य रखने की अलग - अलग क्षमता होती है । धैर्य रखना भी एक प्राकृतिक गुण है , जिसे विकसित करना बेहद मुश्किल है । किसी व्यक्ति में ज्यादा धैर्य होता है और किसी भी बेहद कम । निर्णय क्षमता सबसे बड़ा गुण है । कुछ लोगों की निर्णय क्षमता बहुत तेज होती है । 

आपने अपने आसपास ऐसे बहुत लोगों को देखा होगा , जो अपने फैसले के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं । वहीं , ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है , जो किसी बड़े पद पर होते हुए भी निर्णय नहीं ले पाते हैं ।

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